ग़लत समझ बैठे थे कुछ अपने हमें पर हमने भी...
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ज़िंदगी सब जी रहें हैं पर ज़िंदा कौन है ?
ज़िंदगी सब जी रहें हैं पर ज़िंदा कौन है ? वक़्त...
Continue reading...अब पता चला मौसम पर भी वक़्त का ही नूर था
अब पता चला मौसम पर भी वक़्त का ही नूर...
Continue reading...थकने लगा हूँ अब इस भाग गम भाग की ज़िंदगी से
थकने लगा हूँ अब इस भाग गम भाग की ज़िंदगी...
Continue reading...तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है
तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है आती हैं रूलाती...
Continue reading...तन्हाइयों का भंवर आज घेर रहा है
तन्हाइयों का भंवर आज घेर रहा है कोई अपना मुझे...
Continue reading...ज़िंदगी के पहलुओं से वो कब तक वाकिफ़ करेगा
ज़िंदगी के पहलुओं से वो कब तक वाकिफ़ करेगा मैं...
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