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HELLO EVERYONE………….MY NAME IS SONALI SINGHAL….I LOVE TO WRITE…WRITING MY EXPERIENCE GIVES ME STRENGTH, ENCOURAGEMENT AND POWER TO EXPRESS  AND IT ALSO GIVES  MY WORDS, MY FEELINGS WINGS TO FLY…THANK YOU हिंदी कविताएँ / मेरा अनुभव/शायरी/मन भ्रमन/ मैं कहना चाहती हूँ/ ज़फ़र का सफ़र /एहसासमेरा अनुभव मेरा परिचय 
ये मार्ग दर्शनमुझे तेरी ओर खीचें अधूरे नही है हमपर तुम्हारे बिना पूरे नही है हम 


मैं फिर भी अकेला हूँ

कलयुग में जी रहा हूँ

मीलों लंबे रास्ते नाप रहा हूँ

जो मिलता है

उसके दिल में झाँक रहा हूँ

मैं फिर भी अकेला हौं ………..

भीड़ का हिस्सा हूँ

कई ज़ुबानों का किस्सा हूँ

साथ है मेरे ……मेरे ही फ़ैसले ,

फिर भी जाने क्यों पिसता हूँ

मैं अकेला हूँ,

हिम्मत भी है

निडर भी हूँ ,

जहाँ जाना चाहूं

अगले पल उधर ही हूँ ,

वक़्त का भी साथ है

मैं फिर भी अकेला हूँ ,

रोज़ तूफ़ानो से टकराता हूँ

जैसे तैसे निकल जाता हूँ

अपना अनुभव सबको बतलाता हूँ

मैं फिर भी अकेला हूँ,

नित नई किर्णो का अहसास करता हूँ

जो है उसमे विश्वास रखता हूँ

ना जाने वो कौन सा बिंदु है

जिसकी बेड़ियों से मैं खेला हूँ…

जिसके अहसास के समक्ष

मैं आज भी खुद को पाता अकेला हूँ ….

माँ ज़िंदा है तेरी 

तू भूल गया

सावन का झूला तुझे याद है

माँ का आँचल भूल गया …..

बारिश की छम-छम याद है 

माँ की लोरी भूल गया ,

जिसने तुझे कलेजे से लगा कर रखा 

तू उसे गले लगाना भूल गया ,

जो कान तेरी आवाज़ को तरसते थे 

तू उन्हें आवाज़ लगाना भूल गया,

माँ ने तेरे लिए सब कुछ छोड़ा

तू उसे छोड़ कर चल दिया

माँ तुझे समझती नही

एक पल में ही बोल गया 

ए माँ के दुलारे       

बारिश की बूँदों से तू माँ के आँसुओं को तोल गया…………

तू जीना नही भूला

माँ ज़िंदा है तेरी

तू भूल गया ………….

हार ही माननी होती

तो आपसे यहाँ मिलने नही आते

हम तो खुद को जीतने चले हैं…………….

यूँ ही नही घर से निकले हैं …………..

 महोब्बत में सारे बाज़ार तुम्हें आवाज़ नही देंगे

वादा करते हैं

तुम खुद बाहों में भर कर महोब्बत का इज़हार करोगे

ये दावा करते है..

लोग कहते है

रोशनी से उजाला होता है ,

हम कहते हैं

जहाँ आप आ जाओ ,

वहाँ अंधेरे में आफताब खुद

रोशिनी के साथ होता है ……….

खुद से महोब्बत करना सीख लिया हमने

अब धोका खाने के डर से आज़ाद हैं

अब वक़्त और हालात सब अपने है 

मान लो तो हक़ीक़त वरना सब सपने है

फ़र्क सिर्फ़ इतना है ……………. 

तब खुशियों के हम गुलाम थे

अब मलिक है

हम हमारे ही घुनेगर हैं

हम हमारे ही ग़ालिब है …………